Thursday, August 20, 2026

भूत

हाँ भूत हूं

देख लेता हूं थोड़े दूर से

छू नहीं सकता

सुन लेता हूं कभी बातें पर

बात कर नहीं सकता


आह निकलती है पर

सुनाऊं किसको

आंसू निकलते हैं पर

दिखाऊं किसको

प्यार बहुत आता है

बाहों में भर नहीं सकता

रोज मरता हूं पर

मर नहीं सकता

भूत हूं मैं..


याद आती हैं वो बातें

जिन्हें मैं जीता था

वो प्यार, वो मुस्काने

जिन्हें मैं जीता था

जीतता हूं अब ज़माने से

खुद से हार गया हूँ

कुछ दूर हूं उतना कि 

वैतरणी पार गया हूँ

टूट गया हूँ केतु सा

अब सी नहीं सकता

अब भूत हूं मैं..


#PST