हाँ भूत हूं
देख लेता हूं थोड़े दूर से
छू नहीं सकता
सुन लेता हूं कभी बातें पर
बात कर नहीं सकता
आह निकलती है पर
सुनाऊं किसको
आंसू निकलते हैं पर
दिखाऊं किसको
प्यार बहुत आता है
बाहों में भर नहीं सकता
रोज मरता हूं पर
मर नहीं सकता
भूत हूं मैं..
याद आती हैं वो बातें
जिन्हें मैं जीता था
वो प्यार, वो मुस्काने
जिन्हें मैं जीता था
जीतता हूं अब ज़माने से
खुद से हार गया हूँ
कुछ दूर हूं उतना कि
वैतरणी पार गया हूँ
टूट गया हूँ केतु सा
अब सी नहीं सकता
अब भूत हूं मैं..
#PST
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